लखनऊ। विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश और तेज हवाओं ने मौसम को अप्रत्याशित बना दिया है, बल्कि इससे लोगों के लिए कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसमी परिवर्तन न केवल तापमान में उतार-चढाव लाता है, बल्कि इससे कुछ निश्चित समय के लिए एलर्जी उत्पन्न करने वाले तत्व भी पैदा होते हैं। मौसम में बदलाव के कारण लोगों में खासकर इन्फ्लूएंजा (फ्लू) के मामलों में तेजी आने की संभावना हो जाती है।
केजीएमयू के मेडिसिन विभाग के वरिेष्ठ डा. कौसर उस्मान का कहना है कि वर्तमान में मरीजों में खांसी, बुखार, शरीर में दर्द, गले में खराश और नाक बहने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यह बीमारियां मुख्य रूप से ऊपरी श्वसन तंत्र को प्रभावित करती हैं और संक्रमण बढ़ती होती हैं, जिनमें इन्फ्लूएंजा, एच 3 एन 2, एच वन एन वन और कोविड-19 का फिर से मरीज बढ़ना शामिल है।
डॉ. उस्मान ने कहा कि इनके अलावा, बढ़ते तापमान और दूषित भोजन तथा पानी जैसे कारकों के कारण भी रोगियों में पाचन तंत्र से जुड़ीं डायरिया संबंधी बीमारियां देखी गई हैं। उन्होंने कहा कि अस्थमा, राइनाइटिस और चकत्ते जैसी त्वचा संबंधी एलर्जी से जुड़े रोग भी बढ़ने की संभावना रहती है।
केजीएमयू के श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि मौसमी बदलाव अपने साथ न केवल तापमान में उतार-चढाव लाता है, बल्कि इससे कुछ निश्चित समय के लिए एलर्जी उत्पन्न करने वाले तत्व भी पैदा होते हैं। गर्मी के दौरान धूल और प्रदूषण हो या सर्दी और मानसून के दौरान फफूंद हो- एलर्जी पैदा करने वाले ये तत्व फेफड़ों में जा सकते हैं जिससे सांस लेने में दिक्कत या सांस लेने के दौरान घरघराहट उत्पन्न हो सकती है।
डॉ. संतोष ने कहा कि इस मौसम के दौरान अस्थमा के लक्षणों का मौसमी विस्तार एक सामान्य घटना है।
विशेषज्ञों ने लोगों को इन सबसे बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अगर कोई दिक्कत होती है तो डाक्टर से परामर्श करने के बाद ही दवा का सेवन करना चाहिए।