लखनऊ। कुष्ठ के खात्मे के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इलाज की रणनीति में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। अब कुष्ठ रोगियों को दो के बजाए तीन प्रकार की दवाएं खिलाई जाएंगी। स्वस्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ट्रॉयल के शुरूआती नतीजे आशाजनक आए हैं। अगले साल से नई दवा को शामिल किया जाएगा।
कुष्ठ खांसी और छींकने के दौरान निकलने वाली बूंदों से फैलता है। बीमारी को शुरूआत में रोका जा सकता है। लेकिन बीमारी शरीर में छह साल बाद से पनपना शुरू होते हैं। कुछ मरीजों में बीमारी के लक्षण 20 साल बाद नजर आते हैं। बीमारी की पहचान करना चुनौती से कम नहीं है। जिला कुष्ठ रोग अधिकारी का कहना है कि अभी कुष्ठ रोगियों को दो प्रकार की दवाएं दी जा रही हैं। यह दोनों दवाएं मर्ज पर प्रभावी हैं। सरकारी अस्पतालों में इलाज पूरी तरह से फ्री भी है।
मर्ज को हराने के लिए नई दवा को शामिल किया जाएगा। इसके लिए ट्रॉयल चल रहा है। इसके नतीजे सकारात्मक आएं हैं। अगले साल अप्रैल से नई दवा को इसमें जोड़ा जाएगा। छह से 12 माह के इलाज से बीमारी को हराना आसान होगा। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कुष्ठ रोगियों के लिए दवाएं विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से मिलती हैं। दवाओं का आर्डर दिया गया है। इन दवाओं के अगले साल आने की उम्मीद है।