रजोनिवृत्ति (मीनोपॉज)किसी भी महिला के जीवन में घटने वाली एक स्वभाविक घटना है, जिसमें डिम्बग्रन्थियों में कमी की वजह से मासिक धर्म का स्थायी रूप से रूक जाता है। डिम्ब ग्रंथियों में हार्मोन, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टोजन के उत्पादन में कमी की वजह से होती है।
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अधिकतर महिलाएं रजोनिवृत्ति को लेकर काफी परेशान भी रहती हैं, वहीं इसी दौरान ज्यादा रक्तस्राव होने को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं रहता है।
- स्वभाविक मेनोपॉज अर्थात रजोनिवृत्ति का अर्थ है डिम्ब ग्रंथियों के कार्य में कमी की वजह से माहवारी का स्थायी रूप से समाप्त हो जाना।
- पेरिमेनोपौज अर्थात रजोनिवृत्ति से तत्काल पहले की अवधि (जब रजोनिवृत्ति के नजदीक आने के लक्षण शुरू होते हैं) और रजोनिवृत्ति के बाद का एक वर्ष।
- मेनोपॉज ट्रांजीशन अर्थात रजोनिवृत्ति संक्रमण अंतिम माहवारी की अवधि से पहले की अवधि को कहते हैं जब मासिक धर्म चक्र की अस्थिरता अक्सर बढ़ जाती है। संक्रमण का यह दौर औसतन 3 से 4 वर्ष तक का रहता है।
- सर्जिकल मेनोपॉज अथवा अभिप्रेरित रजोनिवृत्ति का अर्थ है दोनों डिम्ब ग्रंथियों (गर्भाशय हटाने के साथ या उसके बिना) को शल्य चिकित्सा द्बारा निकाल देने या केमोथैरोपी अथवा रेडिएशन से डिम्ब ग्रंथियों के कार्य में चिकित्सा हस्तक्षेप करने के बाद माहवारी समाप्त होना।
- सिपल (सरल) हिस्टेरेटामी (यानी गर्भाशय को हटाना)- इसमें केवल गर्भाशय को या एक डिम्ब ग्रंथि को हटाया जाता है।
- पोस्ट मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति : के बाद का समय इसे अंतिम माहवारी के अवधि के बाद की अवधि के रूप में परिभाषित किया जाता है चाहे रजोनिवृत्ति प्रेरित हो या स्वभाविक हो
- प्रीमेच्योर मेनोपॉज अर्थात समय से पहले रजोनिवृत्ति : समय से पहले रजोनिवृत्ति को ऐसी रजोनिवृत्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है जो औसत अनुमानित रजोनिवृत्ति की आयु से कम आयु में होती है। उदाहरण के लिए, विकाशील देशों में 4० वर्ष के आयु में रजोनिवृत्ति की आयु मान लिया जाता है।
- भारत और अन्य विकासशील देशों में रजोनिवृत्ति की औसत आयु 45 से 5० वर्ष के बीच होती है।