लखनऊ। अक्सर पैर में चोट लगने पर या गरम पानी की सिकाई करने लगते है। यही नहीं किसी प्रकार के तेल या मरहम की मालिश कर देते है। यह नही करके बर्फ की सिकाई करने के साथ चोट वाले स्थान को मोटी पट्टी मेंलपेट कर आराम करे आैर विशेषज्ञ डाक्टर से परामर्श ले। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के स्पोर्टस इंजरी विभाग के प्रमुख डा. आशीष कुमार ने यूपी आर्थोपेडिक एसोसिएशन की ओर से आयोजित ‘अपर लिंब ट्रामा’ कार्यशाला में दी। गोमती नगर स्थित निजी होटल में आयोजित की गयी थी, जिसमें आर्थो विशेषज्ञों ने भाग लिया आैर अपर लिंब इंजरी के बारे में चर्चा की।
स्पोर्टस इंजरी विशेषज्ञ डा. अशीष ने बताया कि ज्यादातर पैर की चोट में मोच आ गयी होती तो हड्डी नहीं टूटी होती है। ऐसे में लोग गरम सिंकाई करने लगते हैं या किसी झोलाछाप के पास हड्डी को बैठाने के लिए चले जाते हैं। इससे चोट को ज्यादा नुकसान हो जाता है। लोगों को जानकारी होनी चाहिए कि मोच में हड्डी नहीं टूटती बल्कि मांसपेशिया फट जाती हैं। इस दौरान कम से कम 48 घंटे नियमित अंतराल पर बरफ से सिंकाई और पूरा आराम ही सबसे बेहतर इलाज है। ।
डॉ. आशीष कुमार ने बताया कि अधिक मालिस भी नहीं करनी चाहिए। इससे फटी मसल्स और खून के थक्के से मायोसाइटिस नाम की नई हड्डी बन जाती है। जिसके लिए सर्जरी ही एकमात्र इलाज बचता है। अगर मोच थोड़ी गंभीर हो तो विशेषज्ञ के परामर्श के बाद ही तीन हफ्ते के लिए कच्चा प्लास्टर लगवा लेना चाहिए।
विशेषज्ञ डॉ. संजीव अवस्थी ने बताया कि हड्डियों की चोट या मोच के बाद अक्सर देशी इलाज करने में यकीन रखते है आैर जब मामला बिगड़ जाता है तो विशेषज्ञ डाक्टर को दिखाने पहुंचते है। उन्होंने बताया कि उनके पास करीब 40 फीसदी तक मरीज ऐसे आ रहे हैं, जो अपनी चोट को गंभीर कर चुके होते हैं। अगर ये समय से आते तो इनके पैसे की भी काफी बचत होती। झोलछापों पर कार्रवाई न होना भी चिंताजनक है। इस अवसर पर डॉ. संतोष सिंह, डॉ. संजीव अवस्थी, डॉ. जान मुखोपाध्याय, डॉ. आशीष बाबुलकर, डॉ. विकास गुप्ता, डॉ. सुधीर वारियर, डॉ. अतुल श्रीवास्तव, डॉ. जमाल अशरफ, डॉ. संजय धवन, डॉ. संजय श्रीवास्तव, डॉ. पी के कंचन और डॉ. विनीत शर्मा ने भी संबोधित किया।
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